प्रबुद्धो ग्रामीण up बोर्ड क्लास 10 हिंदी के अंतर्गत संस्कृत दिग्दर्शिका से लिया गया है। इसमें हमलोग इस पाठ के हिंदी अनुवाद को समझेंगे
एकदा बहवः जनाः धूमयानम् (रेल) आरुह्य नगरं प्रति गच्छन्ति स्म। तेषु केचित् ग्रामीणाः केचिच्च नागरिकाः आसन्। मौनं स्थितेषु तेषु एकः नागरिकः ग्रामीणान् उपहसन् अकथयत् “ग्रामीणाः अद्यापि पूर्ववत् अशिक्षिताः अज्ञाश्च सन्ति।
हिंदी अनुवाद- एकबार बहुत से लोग रेलगाड़ी पर सवार होकर नगर की तरफ जा रहे थे। उसमें से कुछ ग्रामीण और कुछ नागरिक थे। शांत वातावरण होने पर उसमें से एक नागरिक ग्रामीणों का उपहास करते हुए बोला। गांव के लोग आज भी पहले की ही तरह अशिक्षित और अज्ञानी हैं।
न तेषां विकासः अभवत् न च भवितुं शक्नोति।” तस्य तादृशं जल्पनं श्रुत्वा कोऽपि चतुरः ग्रामीणः अब्रवीत्, “भद्र नागरिक ! भवान् एव किञ्चित् ब्रवीतु यतो हि भवान् शिक्षितः बहुज्ञः च अस्ति।” इदम् आकर्ण्य स नागरिकः सदर्षं ग्रीवाम् उन्नमय्य अकथयत्, “कथयिष्यामि, परं पूर्वं समयः विधातव्यः।”
हिंदी अनुवाद- उनमें से न किसी का विकास हुआ है और भविष्य में न किसी के विकास होने की संभावना है। उसके इस प्रकार के भाषण को सुनकर कोई चतुर ग्रामीण बोला हे श्रेष्ठ नागरिक आप ही कुछ बोलिए क्योंकि आप शिक्षित और महाज्ञानी हैं। इस बात को सुनकर वह नागरिक गर्व के साथ बोला कहूंगा पर पहले शर्त रखूंगा।
तस्य तां वार्त्ता श्रुत्वा स चतुरः ग्रामीण अकथयत्, “भोः वयम् अशिक्षिताः भवान् च शिक्षितः, वयम् अल्पज्ञा भवान् च बहुज्ञः, इत्येवं विज्ञाय अस्माभिः समयः कर्त्तव्यः, वयं परस्परं प्रहेलिकां प्रक्ष्यामः। यदि भवान् उत्तरं दातुं समर्थः न भविष्यति तदा भवान् दशरूप्यकाणि दास्यति। यदि वयम् उत्तरं दातुं समर्थाः न भविष्यामः तदा दशरूप्यकाणाम् अर्धं पञ्चरूप्यकाणि दास्यामः।”
हिंदी अनुवाद- उसके इस वार्ता को सुनकर वह चतुर ग्रामीण बोला हम अशिक्षित हैं और आप शिक्षित हैं हम अल्पज्ञानी हैं और आप महा ज्ञानी हैं, ऐसा समझ कर हमारे साथ शर्त करनी चाहिए, हम एक-दूसरे से पहेली पूछेंगे यदि आप उत्तर देने में समर्थ नहीं होंगे तो आप आप दस रुपए देंगे। यदि हम उत्तर देने में समर्थ नहीं होंगे तब दस रुपए का आधा पाँच रुपए आपको देंगे।
“आं, स्वीकृतः समयः”, इति कथिते तस्मिन् नागरिके स ग्रामीणः नागरिकम् अवदत्, “प्रथमं भवान् एव पृच्छतु।” नागरिकश्च तं ग्रामीणम् अकथयत्, “त्वमेव प्रथमं पृच्छ” इति। इदं श्रुत्वा स ग्रामीणः अवदत् “युक्तम्, अहमेव प्रथमं पृच्छामि।”
हिंदी अनुवाद- “हां शर्त स्वीकार है” नागरिक के ऐसा कहने पर वह ग्रामीण नागरिक से कहता है। “पहले आप पूछिए” और नागरिक उस ग्रामीण से कहता है “पहले तुम पूछो” यह सुनकर वह ग्रामीण कहता है पहले मैं ही पूछता हूँ।
अपदो दूरगामी च साक्षरो न च पण्डितः।
अमुखः स्फुटवक्ता च यो जानाति स पण्डितः ॥
हिंदी अनुवाद- बिना पैर के दूर तक जाने वाला है, अक्षर ज्ञान के बिना ज्ञानी है और बिना मुख के स्पष्ट बोलने वाला है। जो इसे जानता है सच्चे अर्थों में वही पंडित है।
अस्या उत्तरं ब्रवीतु भवान्।
हिंदी अनुवाद- इसका उत्तर आप दीजिए।
नागरिकः बहुकालं यावत् अचिन्तयत्, परं प्रहेलिकायाः उत्तर दातुं समर्थः न अभवत्, अतः ग्रामीणम् अवदत्, अहम् अस्याः प्रहेलिकायाः उत्तरं न जानामि। इदं श्रुत्वा ग्रामीणः अकथयत्, यदि भवान् उत्तरं न जानाति, तर्हि ददातु दशरूप्यकाणि। अतः म्लानमुखेन नागरिकेण समयानुसारं दशरूप्यकाणि दत्तानि ।
हिंदी अनुवाद- नागरिक बहुत समय तक सोचा परंतु उत्तर देने में सफल नहीं हुआ। अतः ग्रामीण से बोला, मैं इस पहेली का उत्तर नहीं जानता हूं, तो दस रुपए दो। अतः मलिन मुख से नागरिक शर्त के अनुसार दस रुपए देता है।
पुनः ग्रामीणोऽब्रवीत्, “इदानीं भवान् पृच्छतु प्रहेलिकाम्।” दण्डदानेन खिन्नः नागरिकः बहुकालं विचार्य न काञ्चित् प्रहेलिकाम् अस्मरत्, अतः अधिकं लज्जमानः अब्रवीत्, “स्वकीयायाः प्रहेलिकायाः त्वमेव उत्तरं ब्रूहि।”
हिंदी अनुवाद- पुनः ग्रामीण बोला, “अब आप पहेली पूछें। दंड से दुःखी नागरिक बहुत समय तक विचार करता है लेकिन कोई पहेली याद नहीं आती। अतः अत्यधिक लज्जा मन से बोला। अपनी पहेली का उत्तर तुम ही दो।
तदा स ग्रामीणः विहस्य स्वप्रहेलिकायाः सम्यक् उत्तरम् अवदत् ‘पत्रम्’ इति यतो हि इदं पदेन विनापि दूरं याति, अक्षरैः युक्तमपि न पण्डितः भवति। एतस्मिन्नेव काले तस्य ग्रामीणस्य ग्रामः आगतः।
हिंदी अनुवाद- तब वह ग्रामीण हँसकर सही उत्तर पत्र बताता है। क्योंकि यह पैर के बिना दूर तक जाता है, अक्षरयुक्त न होने पर भी पंडित है।इसी ही समय उस ग्रामीण का गाँव आ जाता है।
स विहसन् रेलयानात् अवतीर्य स्वग्रामं प्रति अचलत्। नागरिकः लज्जितः भूत्वा पूर्ववत् तूष्णीम् अतिष्ठत्। सर्वे यात्रिणः वाचालं तं नागरिकं दृष्ट्वा अहसन्। तदा स नागरिकः अन्वभवत् यत् ज्ञानं सर्वत्र सम्भवति। ग्रामीणाः अपि कदाचित् नागरिकेभ्यः प्रबुद्धतराः भवन्ति।
हिंदी अनुवाद- वह हँसकर रेलगाड़ी से उतरते हुए अपने गाँव की तरफ चल देता है। नागरिक लज्जित होकर पूर्ववत ही शान्त बैठ जाता है। सभी यात्री वाचाल उस नागरिक को देखकर हँसते हैं। तब वह नागरिक अनुभव करता है कि ज्ञान सभी जगह संभव है। ग्रामीणों में भी कभी नागरिकों से अधिक बुद्धिमान रहते हैं।