अन्योक्तिविलास का हिंदी अनुवाद / anyoktivilas hindi anuvad

अन्योक्तिविलास क्लास 10 up बोर्ड हिंदी के अंतर्गत संस्कृत दिग्दर्शिका से लिया गया है।

नितरां नीचोऽस्मीति त्वं खेदं कूप ! कदापि मा कृथाः। अत्यन्तसरसहृदयो यतः परेषां गुणग्रहीताऽसि ।। 1 ।।

हिंदी अनुवाद- हे कुएं तुम ऐसा खेद कभी मत करो कि मैं अत्यधिक नीचा हूं। क्योंकि तुम अत्यन्त सरस हृदय वाले और दूसरे के गुणों को ग्रहण करने वाले हो।

नीर-क्षीर-विवेके हंसालस्यं त्वमेव तनुषे चेत्। विश्वमिस्मन्नधुनान्यः कुलव्रतं पालयिष्यति कः ।12।।

हिंदी अनुवाद- दूध और पानी को अलग करने का विवेक वाला हंस ही यदि अपने काम में आलस्य करने लगे तो इस संसार में ऐसा कौन है जो अपने कुलव्रत का पालन करेगा।

कोकिल ! यापय दिवसान् तावद् विरसान् करीलविटपेषु। 
यावन्मिलदलिमालः कोऽपि रसालः समुल्लसति ।। 3 ।।

हिंदी अनुवाद- हे कोयल तब तक तुम अपने नीरस दिनों को करील के वृक्षों पर बिता लो जब तक भौरों से युक्त कोई आम्रवृक्ष विकसित या पल्लवित न हो जाय।

रे रे चातक ! सावधानमनसा मित्र ! क्षणं श्रूयताम्। अम्भोदा बहवो हि सन्ति गगने सर्वेऽपि नैतादृशाः ।। केचिद् वृष्टिभिरार्द्रयन्ति वसुधां गर्जन्ति केचिद् वृथा। 
यं यं पश्यसि तस्य तस्य पुरतो मा ब्रूहि दीनं वचः ।।4।।

हिंदी अनुवाद- हे चातक मित्र सावधान मन से क्षण भर के लिए सुनों । आकाश में अनेकानेक बादल होते हैं पर सभी एक जैसे नहीं होते हैं। अर्थात् सभी समान दृष्टि से वृष्टि नहीं करते है। उसमें से कुछ बादल अपनी वृष्टि से पृथ्वी को गिला कर देते हैं तो कुछ व्यर्थ में ही गरजते रहते हैं। इसलिए जिस-जिस को देखो उस-उस के सामने अपने दिल की बात मत खोलो। अर्थात् हर व्यक्ति के सामने हमें दीन वचन नहीं बोलना चाहिए।

न वै ताडनात् तापनाद् वह्निमध्ये 
न वै विक्रयात् क्लिश्यमानोऽहमस्मि । 
सुवर्णस्य मे मुख्यदुःखं तदेकं 
यतो मां जना गुञ्जया तोलयन्ति ।।5।।

हिंदी अनुवाद- स्वर्ण कहता है कि न पीटे जाने से, न अग्नि के मध्य तपाए जाने से और न बेचे जाने से दुखी होता हूं। मुझको केवल एक ही दुख है वह यह है कि लोग मुझे गुंचे से तोलते हैं।

रात्रिर्गमिष्यति भविष्यति सुप्रभातं, 
भास्वानुदेष्यति हसिष्यति पंकजालिः। 
इत्थं विचिन्तयति कोशगते द्विरेफे, 
हा हन्त ! हन्त ! नलिनीं गज उज्जहार । ।6।

हिंदी अनुवाद- रात्रि समाप्त हो जाएगी सुंदर सबेरा होगा। सूर्य उदित होगा कमल समूह विकसित हो जाएंगे। कमल के कोश में बंद भौरा ऐसा विचार करता है। तभी कोई हाथी आकर कमल के उस पौधे को उखाड़कर फेंक देता है जिस पौधे में भौंरा बंद था।

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